निजी स्कूलों में शिक्षकों के पास नहीं होती है शिक्षा विभाग की एन ओ सी
ग़ैर सरकारी निजी स्कूलों में अपनी मनमर्जी से शिक्षकों की भर्ती करने पर लगाम कसी जाएगी। अब निजी स्कूल में शिक्षकों की भर्ती शासन की निगरानी में होगी। इससे अयोग्य शिक्षको की भर्ती होने से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा।
प्रदेश सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शासकीय स्कूल में रिक्त पदों पर भर्तियां भले ही टालती आ रही हो लेकिन निजी स्कूलों पर अधिनियम का कढ़ाई से पालन नहीं कराया जा रहा है।
अब निजी स्कूल में शिक्षकों की भर्ती भी सरकारी प्रक्रिया से नहीं हो रही है निजी स्कूलों में शिक्षक की भर्ती के लिए होने वाले इंटरव्यू में निजी स्कूल प्रबंधन के साथ सरकारी प्रतिनिधि भी रहना चाहिए
इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के अफसरों का मानना है कि निजी स्कूल शिक्षकों की भर्ती में आरटीई और सरकारी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
इससे कम योग्यता के शिक्षक भी सेवा में आ रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती अपने प्रतिनिधि की निगरानी में कराएं ताकि इन स्कूल में डी एड और बीएड योग्यताधारी शिक्षक नियुक्त हो सकें।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी स्कूल में डी एड-बीएड योग्यताधारी शिक्षक अनिवार्य किए गए है। अधिकांश स्कूल अभिभावकों से मोटी फीस तो लेते हैं लेकिन स्कूल में 3 से 4 हजार रुपए के वेतन पर बिना डी एड- बी एड धारी शिक्षकों को नियुक्ति दे देते हैं।
पहले से हैं नियम
सरकारी प्रतिनिधि की उपस्थिति में निजी स्कूल में शिक्षकों की भर्ती का नियम पहले से हैं लेकिन निजी स्कूल इसका पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हें डीईओ को भर्ती प्रक्रिया की सूचना पहले से देना चाहिए जो वे नहीं देते हैं। डीईओ को एक प्रतिनिधि की नियुक्ति करना चाहिए जो वर्तमान में नहीं हो रहा है।
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