चौकी से लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचा फरियादी, कोई सुनवाई नहीं
चौकी से लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचा फरियादी, कोई सुनवाई नहीं
पीड़ित परिवार 24 नवंबर 2024 से चौकी नेहरू गार्डन और थाना खोड़ा यहां तक कि पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद तक 26 नवंबर 2024 को अपनी लिखित शिकायती पत्र दे चुका है लेकिन मामला ढाक के तीन पात बराबर रहा है
कुछ ही दिनों बाद पीड़ित परिवार अपनी बडी बेटी
की शादी की तैयारियां कर रहा था
पीड़ित के बताने के अनुसार साढ़े तीन लाख रुपए मकान का बयाना आया था
पीड़ित परिवार की एक बेटी का पड़ोस में रहने वाले एक नाबालिग युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था उसने मौका देख घर में रखी सारी नगदी लेकर प्रेमी संग फरार हो गई।
भारत सरकार का नारा ( मेरा ईमान महिलाओं का सम्मान ) विज्ञापनों में ही सिमट कर रह गया है बात करें उत्तर प्रदेश सरकार की तो महिलाओं के साथ अत्याचार लगातार बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं पुलिस चौकी और थानों में दबंगों की ही सुनवाई होती है और गरीब तबके के व्यक्ति की कहीं सुनवाई नहीं होती है एक गरीब अपनी पीड़ा लेकर पुलिस चौकी नेहरू गार्डन से लेकर पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद तक अपनी शिकायत लेकर गया लेकिन पीड़ित की एफ आई आर दर्ज नहीं हुई अगर होता कोई दबंग व्यक्ति तो तुरन्त एफआईआर दर्ज हो जाती और कार्यवाही भी होती
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